प्राचीन समय में नेपाल के राजा दुर्धर एक वीर और धर्मपरायण शासक थे। एक दिन वन में उनकी भेंट ऋषि कल्प की सुंदर पुत्री से हुई। दोनों का विवाह हुआ और उनका जीवन सुखपूर्वक बीतने लगा।
लेकिन कुछ समय बाद एक राक्षस ने राजा की पत्नी का अपहरण कर लिया। दुःखी राजा हर ओर भटके, पर कोई उपाय नहीं मिला। तब ऋषि कल्प ने उन्हें पवित्र Ujjain जाने और एक दिव्य शिवलिंग की आराधना करने का निर्देश दिया।
राजा दुर्धर उज्जैन पहुँचे और पूरी श्रद्धा से भगवान शिव की कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनकी मनोकामना पूर्ण कर दी और उनकी पत्नी उन्हें वापस मिल गई।
राजा ने भगवान को धन्यवाद दिया और उस शिवलिंग की महिमा दूर-दूर तक फैल गई। कहा जाता है कि राजा दुर्धर की इच्छा पूर्ण होने के कारण उस पवित्र स्थान का नाम Durdhareshwar Mahadev Temple पड़ा। यह मंदिर उज्जैन के प्रसिद्ध 84 महादेव मंदिरों में से एक माना जाता है।
Jai Durdhareshwar Mahadev