महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित Trimbakeshwar Temple भारत के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है। ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी में स्थित यह मंदिर भगवान शिव के त्र्यंबकेश्वर रूप को समर्पित है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि गौतम और उनकी पत्नी अहिल्या ने इस क्षेत्र में कठोर तपस्या की थी। उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने यहां प्रकट होकर मां गंगा को धरती पर अवतरित किया। यही पवित्र धारा आगे चलकर गोदावरी नदी के रूप में प्रसिद्ध हुई, जिसे दक्षिण गंगा कहा जाता है।
वर्तमान मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में Balaji Baji Rao द्वारा कराया गया था। काले पत्थरों से निर्मित इसकी भव्य वास्तुकला मराठा काल की कला और शिल्प का अद्भुत उदाहरण है।
इस मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि यहां ज्योतिर्लिंग में भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश—तीनों के प्रतीक एक साथ विराजमान हैं, जो सृष्टि, पालन और संहार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आज त्र्यंबकेश्वर मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और नासिक कुंभ के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है।
त्र्यंबकेश्वर मंदिर —भक्ति, तपस्या और दिव्य आस्था की अमर गाथा।