मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सिंहस्थ 2028 के आयोजन को भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए सभी परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण की जाएं। इसमें आधुनिक सड़क नेटवर्क, शिप्रा नदी के घाटों का विस्तार, श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त जल उपलब्धता, आवास, पार्किंग, यातायात व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। उन्होंने भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और चिकित्सा सेवाओं के लिए आधुनिक तकनीक आधारित माइक्रो प्लान तैयार करने तथा कर्मचारियों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश भी दिए।
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के अंतर्गत उज्जैन में कई महत्वपूर्ण अधोसंरचना परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। इनमें शनि मंदिर से प्रशांति धाम चौराहा तक नया पुल एवं एप्रोच रोड, तपोभूमि-पिपलियाराघो मार्ग पर कान्ह नदी पर समानांतर पुल, तपोभूमि से गंगेड़ी तक नई दो-लेन सड़क, देवास रोड से लालपुर होते हुए गरोठ मार्ग तक फोर-लेन पंचक्रोशी मार्ग, देवास रोड पर नया विश्राम गृह, पीडब्ल्यूडी सर्किट हाउस का विस्तार एवं नवीनीकरण, लेकोड़ा से टनकारिया रेलवे स्टेशन तक सड़क निर्माण, महाकाल थाना से चौबीस खंबा मार्ग तक नई सड़क तथा कुशाभाऊ ठाकरे मार्ग से छोटी रपट तक सड़क चौड़ीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं।
बैठक में ओंकारेश्वर मंदिर परिसर के विकास के लिए लगभग 160 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इसके अलावा मल्टी लेवल पार्किंग, फूड कोर्ट, प्रशासनिक भवन, अस्पताल, स्टाफ क्वार्टर, रेलवे ओवरब्रिज, सीसी रोड, बैरिक, प्रशिक्षण हॉल तथा कुबेर भंडारी पार्किंग जैसी कई सुविधाओं का निर्माण भी स्वीकृत किया गया। मुख्यमंत्री ने ओंकारेश्वर में आधुनिक अस्पताल और हेलीपैड विकसित करने के निर्देश दिए, जिससे आपदा की स्थिति में एयर एम्बुलेंस जैसी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा सकें।
मुख्यमंत्री ने बड़वाह, ओंकारेश्वर और खेड़ीघाट क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एक पृथक विकास प्राधिकरण गठित करने के निर्देश दिए, जिससे खंडवा और खरगोन जिलों में होने वाले विकास कार्यों का बेहतर समन्वय हो सके। साथ ही ओंकारेश्वर के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की योजना पर भी बल दिया गया।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शिप्रा नदी के घाटों का निर्माण चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। घाटों तक पहुंचने वाले मार्ग, पार्किंग और अन्य सुविधाओं का विकास भी साथ-साथ किया जाए। उन्होंने घाटों के दीर्घकालिक रखरखाव के लिए आसपास के आश्रमों और गुरुकुलों को भी प्रबंधन व्यवस्था से जोड़ने का सुझाव दिया, ताकि सिंहस्थ के बाद भी इन घाटों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।
सिंहस्थ 2028 के दौरान संपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था एक केंद्रीकृत कंट्रोल रूम से संचालित की जाएगी। पुलिस, जिला प्रशासन, नगर निगम और अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए अभी से संयुक्त अभ्यास और प्रशिक्षण शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने आधुनिक तकनीक के उपयोग से भीड़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन और चिकित्सा सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
मार्ग चौड़ीकरण के लिए होने वाली अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में किसी प्रकार का भेदभाव न करने तथा प्रभावित लोगों को समय पर मुआवजा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही पंचक्रोशी मार्ग सहित पूरे उज्जैन क्षेत्र में 15 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे सिंहस्थ के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल सके।
श्रद्धालुओं के लिए आवास, पार्किंग, पेयजल, विश्राम स्थल और अन्य जनसुविधाओं के विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा। उज्जैन के साथ-साथ इंदौर, देवास, खंडवा, आगर-मालवा, शाजापुर, मंदसौर और खरगोन जैसे आसपास के जिलों में भी आवश्यक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। साथ ही पशुपतिनाथ, नलखेड़ा, महेश्वर, मंडलेश्वर और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने इंदौर और उज्जैन क्षेत्र में होटल निर्माण से जुड़े भवन अनुमति आवेदनों का शीघ्र निपटारा करने के निर्देश दिए। इसके अलावा होटल, लॉज, धर्मशाला और होम-स्टे की क्षमता का सर्वेक्षण कर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर आवास व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
महाकाल लोक परिसर में फाइबर से बनी प्रतिमाओं के स्थान पर पत्थर और धातु से निर्मित 99 नई प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं। इनके निर्माण में कटनी, छतरपुर और बालाघाट के उच्च गुणवत्ता वाले पत्थरों का उपयोग किया जाएगा तथा स्थानीय मूर्तिकारों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। साथ ही उज्जैन को देश का प्रमुख मूर्तिकला केंद्र विकसित करने की दिशा में भी कार्य किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उज्जैन के वार्डों और आसपास के गांवों के युवाओं को आपदा प्रबंधन, प्राथमिक उपचार तथा सड़क दुर्घटना में घायलों की सहायता संबंधी प्रशिक्षण दिया जाए। साथ ही राहवीर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाए।
सिंहस्थ 2028 को केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आधुनिक अधोसंरचना, सांस्कृतिक संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और जनसुविधाओं के समग्र विकास का अवसर माना जा रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि उज्जैन और आसपास का पूरा क्षेत्र विश्वस्तरीय आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो, ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और यादगार सिंहस्थ का अनुभव मिल सके।