पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने धर्म और सत्य की रक्षा के लिए अपने क्रोध से काल भैरव को प्रकट किया। काल भैरव को समय का स्वामी और उज्जैन का रक्षक माना जाता है। उनकी शक्ति इतनी प्रबल थी कि दुष्ट शक्तियाँ उनके नाम मात्र से भयभीत हो जाती थीं।
सदियों बाद उज्जैन में उनका यह प्रसिद्ध मंदिर स्थापित हुआ। यहाँ की सबसे अनोखी परंपरा है कि भक्त भगवान काल भैरव को मदिरा अर्पित करते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि जब मदिरा पात्र से भगवान के मुख के पास लगाई जाती है, तो वह धीरे-धीरे अदृश्य हो जाती है। इस रहस्य ने सदियों से श्रद्धालुओं और यात्रियों को आकर्षित किया है।
आज भी हजारों भक्त यहाँ सुरक्षा, साहस और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की कामना लेकर आते हैं। माना जाता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना पर काल भैरव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें सही मार्ग दिखाते हैं।
इसलिए काल भैरव मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, रहस्य और दिव्य संरक्षण का प्रतीक है।