September 10, 2026

नासिक के प्रमुख स्नान घाट (वैष्णव संप्रदाय व आम श्रद्धालु)

Snan Ghats Nashik

नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 के दौरान स्नान के लिए घाटों को दो मुख्य धार्मिक केंद्रों—नासिक शहर (वैष्णव क्षेत्र) और त्र्यंबकेश्वर (शैव क्षेत्र)में विभाजित किया गया है:

नासिक में स्नान मुख्य रूप से पवित्र गोदावरी नदी के तटों पर होता है:

  • रामकुंड (Ramkund) — मुख्य पवित्र कुंड:

    • महत्व: कुंभ का सबसे प्रमुख और पावन स्थल। मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान श्री राम ने यहाँ स्नान किया था और अपने पिता राजा दशरथ का श्राद्ध किया था।

    • विशेषता: तीनों वैष्णव अनी अखाड़े (दिगंबर, निर्वाणी, निर्मोही) अपने अमृत (शाही) स्नान यहीं करते हैं। शाही स्नान के दौरान तड़के यह अखाड़ों के लिए आरक्षित रहता है।

  • लक्ष्मण कुंड व सीता कुंड:

    • रामकुंड के बिल्कुल समीप स्थित छोटे व अत्यंत पवित्र कुंड, जहाँ श्रद्धालु आचमन व स्नान करते हैं।

  • दशश्वमेध / गांधी घाट:

    • रामकुंड के निकट गोदावरी नदी का विस्तृत तट, जहाँ आम श्रद्धालुओं के स्नान और पूजा-पाठ के लिए व्यापक प्रबंध किए जाते हैं।

  • टाकळी संगम घाट (Takli Sangam Ghat):

    • गोदावरी और कपिला नदी के संगम पर स्थित घाट। यह समर्थ रामदास स्वामी की तपोभूमि भी है। भीड़ नियंत्रण के दौरान श्रद्धालुओं के लिए यह एक प्रमुख स्नान स्थल होता है।

  • दशक घाट (Dasak Ghat, पंचवटी के समीप):

    • पुणे और अहिल्यानगर (औरंगाबाद) मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन द्वारा विकसित प्रमुख स्नान घाट।

  • कन्नमवार पुल घाट / तपोवन घाट:

    • साधुग्राम (तपोवन) के पास स्थित घाट, जहाँ दूर-दराज से आने वाले तीर्थयात्रियों के सुगम स्नान के लिए विशेष व्यवस्था होती है।

त्र्यंबकेश्वर के प्रमुख स्नान घाट (शैव संप्रदाय)

त्र्यंबकेश्वर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है तथा गोदावरी (गंगा) का उद्गम स्थल है:

  • कुशावर्त कुंड (Kushavarta Kund) — मुख्य शैव तीर्थ:

    • महत्व: कुंभ का सर्वाधिक महत्वपूर्ण शैव केंद्र। मान्यता है कि महर्षि गौतम ने कुश (घास) की बाड़ लगाकर यहाँ गोदावरी को प्रकट किया था।

    • विशेषता: शैव, संन्यासी, उदासीन और निर्मल अखाड़ों के नागा साधु अपने तीनों अमृत स्नान कुशावर्त कुंड में ही करते हैं।

  • अहिल्या संगम / गौतम तीर्थ घाट:

    • कुशावर्त कुंड के आसपास स्थित अतिरिक्त जलस्रोत व घाट, जहाँ आम श्रद्धालु व तीर्थयात्री स्नान करते हैं।

      घाटों पर स्नान के लिए आवश्यक नियम व व्यवस्था

      1. शाही स्नान के दिन समय-सीमा: अमृत स्नान (2 अगस्त, 31 अगस्त और 11–12 सितंबर 2027) के दिन मुख्य कुंड (रामकुंड व कुशावर्त) सुबह के समय केवल अखाड़ों के साधु-संतों के लिए सुरक्षित रहते हैं। आम श्रद्धालुओं को दोपहर 12-1 बजे के बाद ही इनमें प्रवेश की अनुमति मिलती है।

      2. वैकल्पिक घाटों का उपयोग: शाही स्नान की सुबह अत्यधिक भीड़ और सुरक्षा कारणों से आम तीर्थयात्री रामकुंड की बजाय तपोवन, गांधी घाट या दशक घाट पर स्नान कर सकते हैं।